Saturday, February 20, 2016

6> गाय चोरी करने के चलते भीष्म+भीष्म ने कृष्ण को कर दिया था मजबूर प्रतिज्ञा तोड़ने+द्रौपदी से अधिक प्रेम करता था+Draupadi from Mahabharat

6>|| *गाय चोरी करने के चलते भीष्म***( 1 to 6 )

1>गाय चोरी करने के चलते भीष्म को भुगतनी पड़ी थी ये यातना!
2>==भीष्म ने कृष्ण को कर दिया था मजबूर प्रतिज्ञा तोड़ने के लिए!
3>=वो कौन है जो द्रौपदी से अधिक प्रेम करता था ?
4>==Draupadi from Mahabharat could have 14 husbands instead of 5
5>भीष्म ने युधिस्ठर को बताई थी चार महत्वपूर्ण बाते, जिनसे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है !
6>क्यों थे भीष्म पितामह एक अजेय योद्धा?
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1>गाय चोरी करने के चलते भीष्म को भुगतनी पड़ी थी ये यातना!
मरने से पहले भीष्म ने अपने लिए सिरहाने की मांग की तो अर्जुन ने बाणो से सिरहाने भी बना दिया, मुंह में तुलसी का पत्ता रखा और गंगा जल माँगा तो अर्जुन ने बाण छोड़ सीधी गंगा की धार उनके मुंह में पहुंचा दी. जब प्राण निकल रहे थे तो युधिष्ठिर को बुला उन्होंने विष्णुसहश्त्र नाम ( जो उनके द्वारा ही रचित था) सौंपा और चल बसे.
महाभारत के सबसे तकड़े चरित्रों में से एक थे लेकिन सवाल ये है की उनकी ये दुर्गति क्यों हुई क्यों उन्हें ये कष्ट भोगना पड़ा, जानने के लिए उनके पिछले जन्म में जाना पड़ेगा. हमारे शास्त्रो में अष्ट वसुओ का वर्णन, वो एक दिन वशिष्ठ ऋषि के आश्रम गए और कामधेनु को देख उनका जी ललचा गया.
उनमे से एक प्रभास ने उसे चोरी करने का निर्णय किया जिसमे बाकि सभी ने सहायता की लेकिन पकडे गए, तब उन्हें श्राप में मनुष्य जन्म भुगतना था. जब सब ने क्षमा मांगी तो बाकि 7 को जन्मते ही मुक्ति मिली लेकिन प्रभास को चिर आयु तक जीवन मिला वो ही भीष्म थे.

परशुराम ने उन्हें युद्ध कला तो इंद्र ने अश्त्र दिए, मार्कण्डेय ने उन्हें चीर यौवन तो बाकि सब ने राजपथ और राजनीती की शिक्षा दी थी. महाभारत के युद्ध में वो रोज दस हजार सैनिको और एक हजार घुड़सवारों को मारते थे, पांडवो से स्नेह के कारण वो उन्हें नही मार रहे थे.
इस पर दुयोधन ने उन बुरा भला कहा तो उन्होंने प्रण किया की या तो वो कल अर्जुन को मार देंगे या फिर कृष्ण की हथियार न उठाने की प्रतिज्ञा तुड़वा देंगे. अर्जुन शक्तिशाली था पर उन्हें सामने कुछ न था, उन्होंने अर्जुन को पछाड़ दिया और जैसे ही मारने लगे तो कृष्ण ने रथ का पहिया उठा लिया जो उनकी प्रतिज्ञा के विपरीत था.
तब अर्जुन कृष्ण के कहने पर रात में उनक शिविर में गया और उनकी मौत का करक पूछने लगा तो शिखंडी का समाधान मिला. उनके जीवित रहते धरती पे उनके समाल कोई पराक्रमी नही था और उनके रहते पांडवो का जीवित रहना भी नामुनकिन था, ऐसे भीष्म तब दुनिया से मुक्त ब्रह्म लोक में चले गए.
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2>==भीष्म ने कृष्ण को कर दिया था मजबूर प्रतिज्ञा तोड़ने के लिए!


बात तब की है जब महाभारत के युद्ध के लिए अपनी तरफ से लड़ने के लिए कौरव और पांडव समर्थन जूता रहे थे, द्वारका के राजा कृष्ण के पास दोनों ही पहुंचे पर दुर्योधन अर्जुन से पहले पहुँच गया.


पहले पहुँचने के चलते कृष्ण ने उसे पहले मांगने का अवसर दिया और अपने समर्थन के दो हिस्से किये एक तरफ तो कृष्ण की पूरी अक्षोणी सेना थी तो दूसरी तरफ कृष्ण अकेले निहत्थे.


दोनों ही मित्र पक्ष होने के कारण कृष्ण ने प्रतिज्ञा की के वो युद्ध के दौरान शास्त्र नही उठाएंगे, ऐसे में लोभ वष दुर्योधन ने कृष्ण की सेना का समर्थन ही मांग लिया निहत्थे कृष्ण उसके किस काम के थे. इस पर कृष्ण मुस्कुराये और अर्जुन ने तब कृष्ण को अपने सारथि के रूप में मांग लिया, जब दुर्योधन हस्तिनापुर पहुंचा तो शकुनि ने उसे बहुत दुत्कारा और कहा की कृष्ण निहत्था ही सब पे भारी पड़ेगा.


लेकिन जब युद्ध का तीसरा दिन शुरू हुआ और भीष्म ने गरुड़ व्यूवरचना से पांडवो को घेरा तो सारी पांडव सेना और मित्र देश के राजा भाग खड़े हुए, अर्जुन पितामह से प्रेम वश उनपे पूरी शक्ति से हमला नही कर रहा था और इस कारन भीष्म और उग्र थे उन्होंने कृष्ण अर्जुन पे वाणो की ऐसी वर्षा की के दोनों घायल हो गए.


तब पर भी अर्जुन को क्रोध न आया और उसका मोह न टुटा तो कृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ते हुए सुदर्शन चक्र उठा लिया और भीष्म और कौरवो की तरफ ऐसे बढे की कौरवो में जान का भय पैदा हो गया.


हालाँकि भीष्म विचलित नही हुए और अपने हथियार डाल के कृष्ण के आगे नतमस्तक हो गए और उन्हें नमस्कार किया, बोले आज मेरा पुरुषार्थ सिद्ध हो गया मैंने स्वयं भगवन को अपनी प्रतिज्ञा तुड़वाने पर विवश कर दिया.

इतने में अर्जुन पीछे से दौड़ते हुए आया और कृष्ण से माफ़ी मांगी और अपनी प्रतिज्ञा न तोड़ने की गुहार की और तब जाके कृष्ण का क्रोध शांत हुआ, तब से अर्जुन कुछ लोहा लेने लगा लेकिन कृष्ण के विराट स्वरुप दिखा गीता ज्ञान देने के बाद ही वो भीष्म को मार पाया.
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3>=वो कौन है जो द्रौपदी से अधिक प्रेम करता था ?

आप सभी जानते है कि पांचाल राज्य की राजकुमारी द्रौपदी का स्वयंवर अर्जुन अर्जुन के साथ हुआ था जबकि माता कुंती की आज्ञा के कारण ही द्रौपदी को पांचों पांडवों से शादी करनी पड़ी। और नियमानुसार द्रौपदी हर भाई के साथ कुछ समय तक ही रहती थी।


जब एक भाई द्रौपदी के कक्ष में रहता था तो अपने जूते को कक्ष के बाहर छोड़ देता था जिससे कि कोई भी दूसरा भाई द्रौपती के कमरे में आ नहीं सके। और एक बार जब युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ में थे तब गलती पूर्वक अर्जुन उनके कक्ष में पहुंच गए लेकिन बाहर खुले जूते कुत्ता लेकर भाग गया था।

एवं अर्जुन को इसका दंड मिला और उसे जंगल में रहना पड़ा। अर्जुन को वन में जाने से द्रौपदी को बहुत दुःख हुआ परन्तु द्रौपदी के सबसे अधिक प्रेमी अर्जुन नहीं थे। कुछ घटनाएं ऐसी घटी थी कि जिनसे ऐसा पता चलता है द्रौपदी का सबसे बड़ा प्रेम करने वाला था तो वो भीम थे।

आपको बता दे कि महाभारत में एक घटना यह भी है कि दुर्योधन ने एक सोची समझी साजिश रची जिसमें युधिष्ठिर को जुआ खेलने के लिए बुलाया। और दुर्योधन ने धोके से युधिष्ठिर को जुए में हरा दिया। दुर्योधन के बहुत अधिक उकसाने पर युधिष्ठिर ने जुए में एक-एक करके अपने सभी भाइयों को जुए में लगा दिया और हार गए।

और अंत में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को भी दाव पर लगाया। तभी द्रौपदी को दांव पर लगाने पर सबसे अधिक क्रोधित भीम ही हुए थे एवं युधिष्ठिर से बहस भी किया था।


भीम की नहीं मानने पर जब युधिष्ठिर द्रौपदी को जुए में हार गए और दुश्‍शासन द्रौपदी को बालों से पकड़कर भरी सभा में ले आया तो भीम अपने गुस्से को काबू नहीं रख सका और उसी वक्त प्रतिज्ञा ले ली कि दुश्शासन की छाती का खून पीहुँगा । महाभारत के युद्ध के समय भीम ने अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया था।


जुए में हार जाने के बाद पाण्डवों को बारह वर्ष का वनवास और एक साल का अज्ञातवास मिला। अज्ञातवास के वक्त पाण्डव राजा विराट के यहां पर अपना भेष बदलकर रहे। राजा विराट का साला कीचक द्रौपदी को देखते ही कामाशक्त हो गया था।


कीचक ने द्रौपदी को रात के वक्त अपने कमरे में बुलाया। और यह बात जब द्रौपदी ने भीम को बताई तो भीम ने कीचक को मौत देने का संकल्प लिया और रात के समय द्रौपदी की जगह खुद कीचक के कक्ष में पहुंच गए।

द्रौपदी समझकर जैसे ही कीचक ने हाथ लगाया। भीम ने कीचक को उठाकर पटक दिया। और दोनों के बीच युद्ध होने लगा और भीम ने कीचक को मर दिया।


भीम द्रौपदी से काफी प्यार करते थे कि उन्हें द्रौपदी का कोई भी अपमान करे पसंद नहीं था। द्युत खेल के समय जब जुए में युधिष्ठिर सब कुछ हार चुके थे और द्रौपदी को दुश्शासन ने सभा में खींचकर लाया था उस समय भीम गुस्से से आग बबूला हो रहे थे।

ऐसे वक्त में दुर्योधन ने अपनी जंघ पिटकर द्रौपदी को जंघा पर बैठने के लिए कहा था। भीम से द्रौपदी का अपमान सहन नहीं हुआ और भीम ने दुर्योधन को ललकारते हुए कहा कि युद्ध में मैं तुम्हारी जंघा तोड़कर ही द्रौपदी के अपमान का बदला लूंगा।

महाभारत युद्ध के अंतिम में जब भीम और दुर्योधन का युद्ध हुआ तभी भीम ने द्रौपदी के अपमान का बदला ले लिया।

और भीम के प्यार की दास्तान चौथी घटना उस समय हुई जब पाण्डव अपना राज पाट परीक्षित को सौंपकर स्वर्ग के लिए चले। स्वर्ग की यात्रा बहुत ही कठिन और दुःखदायी थी। इस यात्रा के समय भीम ने द्रौपदी का सबसे ज्यादा ध्यान रखा।

यात्रा करते हुए जब पाण्डव ब्रदीनाथ पहुंचे और वहां से आगे चले तो सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर नदी को पार करना द्रौपदी के लिए बहुत कठिन हो गया था। एवं ऐसे समय में भीम ने एक बड़ा सा चट्टान उठाकर नदी के बीच में रख दिया।


द्रौपदी इस चट्टान पर चढ़कर सरस्वती नदी पार कर गई। और यह चट्टान आज भी माणा गांव में सरस्वती नदी के उद्गम पर दिखता है। जिसे भीम पुल कहा जाता है।


स्वर्ग की यात्रा के लिए जब पाण्डव बद्रीनाथ से आगे निकले तो हिमालय के बर्फीले क्षेत्र में एक एक कदम आगे बढ़ाना कठिन हो गया था। पांचों पाण्डव जैसे तैसे बढ़ रहे थे और अचानक नकुल, सहदेव फिसल कर खाई में गिर गए और सशरीर स्वर्ग में नहीं जा सके।

जब भीम, अर्जन, युधिष्ठिर और द्रौपदी बचे तब द्रौपदी भीम का सहारा लेकर चलने लगी पर द्रौपदी भी ज्यादा दूर नहीं चल सकी और वह भी गिरने लगी। ऐसे वक्त में भीम ने द्रौपदी को संभाला।

इसी समय द्रौपदी ने कहा था कि सभी पांचो भाइयो में भीम ने ही मुझे सबसे अधिक प्रेम किया है और मैं अगले जन्म में दुबारा भीम की धर्मपत्नी बनना चाहूंगी। इसके कुछ समय बाद द्रौपदी ने भी इन सभी का साथ हमेशा के लिए छोड़ कर चली गयी।
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4>==Draupadi from Mahabharat could have 14 husbands instead of 5

Draupadi, the wife of five Pandavas, had an eventful life. She was born when Draupad performed yagya to take revenge from Drona. She was born along with Dhrishtdyumna, who fought the war of Mahabharat with

Pandavas.

Draupadi’s 14 husbands wish granted by Lord Shiva
She became the wife of all Pandavas not by an accident, but by design. Lord Krishna explained to her that she prayed to Lord Shiva to grant her a husband with 14 desired qualities. Shiva, pleased with her devotion, told her that it would be very difficult to get a husband with 14 qualities that she desired. But she insisted. Lord Shiva finally accepted her wish and granted her 14 husbands in her next birth. Draupadi asked for these qualities in her previous birth. In her previous birth she was Nalayani – daughter of Nala and Dmayanti.

Was her wish a curse or boon for her?
She queried Lord Shiva was this a boon or curse? Shiva promised that she would regain her virginity each morning when she took bath as a boon to her.

The 14 qualities Draupadi desired

The 14 qualities that Draupadi wanted were available in 5 Pandavas. The just Yudhisthar for his wisdom of Dharma; the powerful Bheem for his strength that exceeded that of a thousand elephants combined; the valiant Arjun for his courage and knowledge of the battlefield; the exceedingly handsome Nakul and Sahdeva for their love.
Draupadi was presented a magical bowl
Draupadi had a wooden bowl, which would always be filled with food. This bowl was presented to her, while the Pandavas were on an exile. The bowl helped the Pandavas to survive in forest.

Karna could be Draupadi’s husband

Draupadi refused participation of Karna in swayamvar. She refused to be the wife of Suta-Putra (son of a charioteer). Karna too could have won the competition.
Draupadi responsible for Mahabharat war

The seeds of Mahabharat war were sown by Draupadi. It is said that Draupadi once said about Duryodhan that blind’s sons are also blind.

Draupadi’s 5 avatars

According to Narad Purana and Vayu Purana, Draupadi is the composite avatar of Goddess Shyamala (wife of Dharma), Bharati (wife of Vayu), Shachi (wife of Indra), Usha (wife of Ashwins) and Parvati (wife of Shiva).

In earlier avatars, she did assume important avatars. The first time was as Vedavati who cursed Raavan. She then came in place of Sita’s avatar, to be the cause of Raavan’s death, while agni hid the real Sita.

Her third incarnation was partial either Damayanti or her daughter Nalayani. She married sage mudgala. The fifth avatar was Draupadi herself.
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5>भीष्म ने युधिस्ठर को बताई थी चार महत्वपूर्ण बाते, जिनसे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है !

हर किसी के जन्म से पूर्व ही उसके मृत्यु का निर्धारण हो जाता है इसमें वह कुछ भी नहीं कर सकता क्योकि यही सृष्टि का नियम है. जो इस मृत्युलोक में जन्म लेगा एक न एक दिन उसकी मृत्यु होना तय है. परन्तु प्रसिद्ध हिन्दूधर्म ग्रन्थ महाभारत के अनुसार यह बताया गया है की मनुष्य में इतना सामर्थ्य होता है की वह अपने आचरण से अपने भाग्य को बदल सकता है.
जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब युधिस्ठर हस्तिनापुर का राजा बनने के बाद तीरो के शैय्या में लेटे भीष्म पितामह से ज्ञान लेने आये. तब भीष्म पितामह ने राजा युधिस्ठर को चार बहुत ही अनमोल एवं महत्वपूर्ण बात बताई जिन्हे यदि कोई मनुष्य अपने आचरण में अपना ले तो वह न केवल अपने भाग्य को बदल सकता बल्कि अपने अकाल मृत्यु को भी मात दे सकता है. आइये जानते है उन चार बातो को जिन्हे अपनाकर आप भी अपनी मृत्यु को टाल सकते हो.

हिंसा का त्याग कर :-

यदि कोई मनुष्य हिंसा का त्याग कर अहिंसा को अपने जीवन में अपना ले तो वह व्यक्ति अपने सम्पूर्ण जीवन में सदैव सुखी रहेगा. किसी को पीटना , किसी के साथ मारपीट करना या किसी के साथ हिंसा करना इस प्रकार के व्यक्ति ऐसा कर दूसरों को तो चोट पहुंचाते है साथ ही वे खुद भी इस के चपेट में आ जाते है और अपने आप को नुकसान पहुंचा बैठते है.

जो व्यक्ति सदैव दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है तथा दूसरों के मदद के लिए सदैव त्तपर रहता है ऐसे व्यक्ति हमेशा भगवान को प्रिय होते है तथा वे उनकी रक्षा करते है. इस प्रकार के गुण को अपनाने वाले व्यक्ति की आयु निश्चित ही लम्बी होती है. पुराणों और धर्म ग्रंथो में अहिंसा को मनुष्य का परम धर्म बताया गया है अतः हमे इन तीनो (मन, वचन, कर्म) प्रकार के हिंसा से सदैव बचकर रहना चाहिए. मन से हिंसा का अभिप्राय किसी के बारे में बुरे विचार सोचने से है, वचन से अभिप्राय दूसरे के बारे में बुरा बोलने व कर्म से अभिप्राय किसी को शारीरिक कष्ट पहुंचाने से है.
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6>क्यों थे भीष्म पितामह एक अजेय योद्धा?
भीष्म की शक्ति

इसी के आधार पर उन्होंने सारे नियम बनाए। उन्होंने दैनिक जीवन के सरल नियमों को भी अपनी चरम प्रकृति तक पहुंचने का सोपान बना लिया। भीष्म ने इतनी भीषण प्रतिज्ञा कर डाली, उनकी प्रतिज्ञा को हम भीषण इसलिए नहीं कहते क्योंकि वह ब्रह्मचारी बन गए या सारा राजपाट त्याग दिया, उनकी व्यक्तिगत असुविधा या क्षति के लिए भी हम उसे भीषण नहीं कहते बल्कि इसलिए कहते हैं क्योंकि वह जिस कुरुवंश और देश से इतना प्रेम करते थे, उन्होंने उसे दांव पर लगा दिया। जो चीज उनके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी, उन्होंने उसे ही दांव पर लगा दिया और कहा कि यही उनका धर्म और मोक्ष प्राप्ति का रास्ता है।

जैसे-जैसे हम महाभारत की कहानी में आगे बढ़ते हैं, आपको तमाम ऐसी परिस्थितियां दिखाई देती हैं, जहां भीष्म लगभग अतिमानव या सुपरमैन नजर आते हैं। यदि कोई मनुष्य अपने भीतर मौजूद जीवन के बीज को रूपांतरित करने के लिए तैयार है, वह कोशिका जो एक और मनुष्य के निर्माण में समर्थ है, उसे वह जीवन शक्ति में रूपांतरित करने के लिए तैयार है, तो वह परमाणु बल की तरह शक्तिशाली हो जाता है। आपको पता ही है एक परमाणु कितनी ऊर्जा पैदा कर सकता है।

कई बार लोगों ने कहा कि वे भीष्म से नहीं लड़ सकते क्योंकि वह एक ब्रह्मचारी हैं। वे उन्हें नहीं मार सकते थे क्योंकि उन्होंने अपने शरीर के हर बीज को एक जीवनी शक्ति में रूपांतरित कर दिया था, जिसके कारण वह अपनी इच्छा से मृत्यु को प्राप्त कर सकते थे। इसीलिए कहा गया था कि भीष्म के पास अपनी मृत्यु का समय चुनने की शक्ति थी। वह अनश्वर या अमर नहीं थे, मगर वह अपनी मृत्यु का समय और स्थान चुन सकते थे, जो एक तरह से अमरता की तरह ही है। अमरता एक अभिशाप की तरह है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर आपको हमेशा के लिए जीना पडे, तो यह आपके लिए कितनी बड़ी यातना होगी? तो अमरता तो एक अभिशाप है, लेकिन अपनी इच्छा से मरने का विकल्प एक वरदान है।
महाभारत – अपने समय से काफी आगे

यह अपनी ऊर्जा और प्रकृति की ऊर्जा का लाभ उठाने की एक प्रक्रिया है। महाभारत में दूसरा उदाहरण अस्त्र हैं, जो शक्तिशाली हथियार होते थे। कहा जाता था कि अस्तित्व के सबसे छोटे कण को युद्धभूमि में सबसे बड़ी शक्ति बनाया जा सकता था। यह परमाणु बम की तरह लगता है, हालांकि वे उस समय भी तीर-धनुषों का प्रयोग करते थे। कुछ अस्त्रों के असर के बारे में बताते हुए ऐसी बातें कही गईं कि ‘चाहे आप इस अस्त्र से पूरी दुनिया को नष्ट न करें, गर्भ में मौजूद शिशु तब भी झुलस जाएंगे।’ यह भी परमाणु हथियारों के असर जैसा लगता है।

या तो उनके पास बहुत ही शानदार कल्पनाशक्ति थी, या उनके पास वाकई इस तरह का ज्ञान था। क्या उनके पास इस तरह के हथियार थे, क्या उन्होंने ऐसे हथियार कहीं देखे थे या किसी ने कहीं से आकर उन्हें ये बातें बताई थीं? यह हम नहीं जानते मगर आपको एक खास जागरूकता और सतर्कता के साथ इस कहानी को देखना चाहिए। यह कहानी कुछ लोगों की लड़ाई की या किसी व्यक्ति के राजपाट, पत्नी या बच्चे की इच्छा की नहीं है। इस कहानी के कई आयाम हैं।
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